बहुत मासूम लड़की है इश्क़ की बात नहीं समझती।



                                                            काले बादलों के ख्याल।

कमरे की घुटन ने अनायास ही मुझे आज छत पर पहुंचा। कई दिनों की तपिश के बाद आसमान में आज काले बादल छाये हुए थे। दक्षिण से आती हवा किसी तपती मिटटी पर गिरी बारिश की बूंदो की महक मुझ तक ला रही थी। दक्षिण से आती इन हवाओं ने मेरा ध्यान मेरे कुछ इंदौर के दोस्तों पर ला दिया शायद इसी तरह बादलों के साथ उनको भी मेरा ख्याल जहन में उतरा होगा जिस तरह ये हवाएं उनका ख्याल मुझ तक ले आयी। आसमान में त्रिशूल की तरह बिजली चमकी और तेज़ गड़गड़हाट हुई और एक दम से बचपन के एक दोस्त रवि का ख्याल मेरे जेहन में हंसी के गुबार की तरह फूट पड़ा। रवि बिजली चमकने से बहुत डरता था। हम मैदान में क्रिकेट खेल रहे होते थे और रवि बिजली चमकने पर पेड़ की ओट का सहारा ले रहा होता था तब हम उसे और डराते और वह पुरे मैदान में यहाँ से वहां छुपने को दौड़ता रहता।
ख्यालों-ख्यालों में सर पर बारिश की बुँदे पड़ने लगी और दिल में पुरे शहर को भीगते देखने की ख्वाहिश सी हुई। मै सबसे ऊपर वाली पर आकर शहर को देखने लगा। काले बादलों में खोये सूरज की रोशनी बादलों को चीरते आसमान में फ़ैल रही थी और उसके नीचे पहाड़ पर लगा टावर ऐसे लग रहा था जैसे किसी दिव्य पौराणिक घटना का प्रतिविम्ब बना रहा हो।
कुछ देर बूदें पड़ने के बाद चारो तरफ एक सुकून सा व्याप्त हो गया। चिड़ियाँ फिर से चहचाने लगी, गिलहरियों दौड़ लगाने लगी।हवायें उत्तर की ओर मीलों आगे बढ़ चुकी थी। शायद दिल्ली तक! किसी और को भी मेरा ख्याल हवाओं में बहकर शायद उतर आया था। उर्दू जवान में उसने पूछा - कैसे हैं जनाब?
बिलकुल आपके सर के ऊपर के काले बादलों जैसा। मैंने कहा।
तुमको कैसे पता यहाँ बादल आये हुए है ?
मेने ही तो भेजे है। मैंने कहा। 
तो महादेव बारिश भी करा दीजिये ? बोलकर भी वो हंसी।
अगर करा दूँ तो छत पर भीगने आओगी? मेने पूछा
ना। बिजली चमकने से डरती हूँ मै और काले बादलों में बुरे-बुरे ख्याल मन में आते है। जैसे की तुम्हारा आ गया। इस बात पर हम दोनों हंस पड़े।
और दिल ज़ाकिर भाई की इस बात पर मुस्कुरा दिया की - बहुत मासूम लड़की है इश्क़ की बात नहीं समझती।




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