बॉलीवुड:नेपोटिज्म मतलब या तो हमारी तरह या सुशांत की तरह ( My way or Sushant way)


                                                  12:13 PM · Oct 11, 2019 twitter profile

एहसान तेरा होगा मुझ पर दिल चाहता है वो कहने दो ...
(सुशांत द्वारा की गई ट्विटर पोस्ट )
                                                    

जनरली नेपोटिज्म का मतलब अपनों को फेवर करने की धारणा से है, लेकिन बॉलीवुड में यह यही तक सीमित नहीं है, बल्कि हालिया संदर्भो में हम देखे तो नेपोटिज्म बॉलीवुड में अपनों के लिए(नेपो किड्स/स्टार किड्स ) बाहर से आ रहे उम्दा टैलेंट से इंसेक्यूरिटी के चलते एक सुरक्षा कवच बन के खड़ा रहता है और इसी प्रोटेक्शनिज़्म के सिद्धांत पर चलके ये बाहर से आये किसी अभिमन्यु को व्यूह बनाकर घेर लेते है बशर्ते अगर वह इनके कहे अनुसार चले तो शायद अक्षय, शाहरुख़ की तरह अपवाद हो सकता है।
इंसेक्युरिटी की इसी भावना का परिणाम है की पिछले  20  वर्षों में बॉलीवुड के मैन-स्ट्रीम सिनेमा में महज जॉन-अब्राहम ही एक एक्टर है जो अपनी जगह बना पाया है। सुशांत भी इसी मैन-स्ट्रीम सिनेमा का हिस्सा होना चाहता था, पर साथ ही साथ अपना रास्ता अपने विश्वासों पर, मूल्यों पर ही तय करना चाहता था बिलकुल इरफ़ान खान की तरह। पर इरफ़ान कभी बॉलीवुड के गटर में फंसे ही नहीं और स्टोरी-सेंट्रिक बड़े इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स के छोटे चेहरे बन कर मुकम्मल हो गए। सुशांत बॉलीवुड के गटर में फंसकर अवसाद के कुंए में ऐसा गिरा की जिंदगी को उसमे से फिर कभी नहीं देख पाया। सुशांत, इरफ़ान की तरह ही अपने काम में मकसद खोजना चाहता था अपने निभाये किरदारों को जीना चाहता था, अपने काम को लेके ईमानदार और जिम्मेदार होना चाहता था। पैसों के लिए नहीं अपने काम में मकसद के साथ जुड़ना चाहता था।  इसीलिए सुशांत ने 15 करोड़ के एक ब्यूटी-क्रीम को एंडोर्स करने से मना कर दिया क्यूंकि वह ना ही पर्सनली ऐसी किसी बात से इत्तेफाक रखता था ना ही सामाजिक रूप से ऐसे किसी बात का प्रचार करना चाहता था परन्तु जब सुशांत ने इसी तरह मुकेश भट्ट द्वारा लाये आशिक़ी 2 प्रोजेक्ट को खुद के लिए `मटेरिअली अनफिट `बताया तो बकौल मुकेश भट्ट उनको वह `डिस्टर्बड सोल ` और परवीन बाबी(आत्मघाती) के रास्ते  पर चलता हुआ लगा। सुशांत की मौत पर मुकेश भट्ट दावा करते हुए कहते है की उन्हें पता था ये होने वाला है। सही मायनो में पहली ही मुलाकात  में मुकेश को सुशांत की सेलेक्टिविटी सेल्फ-डेस्ट्रक्टिविटी लगी जो उन्होंने अपने बड़े भाई महेश से भी बयां की। ये और कुछ नहीं सिर्फ ये दिखाता है की जो इंडस्ट्री के माई - बाप बने बैठे है वो एक एक्टर  की स्वछन्द सोच को किस तरह देखते है। 
   

( क्वांटम फिजिक्स में रूचि रखने वाले सुशांत ब्रम्हांड के रास्ते  आत्म को समझने प्रेरित थे, ये पोस्ट उनकी इसी बौद्धिकता का प्रमाण है ) 
The Avatamsaka Sutra describes enlightenment as an awareness of the “interpenetration of space and time.”
One can’t help but wonder if Einstein’s theory of relativity that unifies space and time was just a stroke of genius or also a glimpse of the divine.




दरअसल इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था इन्ही स्टार्स के इर्द-गिर्द घूमती है। सभी इंडस्ट्री के माफिया सुशांत में सम्भावनाये देख रहे थे पर कुछ प्रोजेक्ट्स पर सुशांत सहमत नहीं थे और कुछ पर जिनको वो करना चाहते थे उनको यशराज के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट की वजह से उन्हें करने नहीं दिया जा रहा था और अंततः यशराज के पानी प्रोजेक्ट से हाथ खींच लेने के बाद सुशांत ने यशराज से भी कॉन्ट्रैक्ट तोड़ लिया। इस तरह लगभग सभी प्रोडक्शन हाउसेस की नजरो में सुशांत खटक गए और सभी ने मिलकर सुशांत को बायकाट कर दिया। (इसमें सलमान खान का प्रोडक्शन हाउस skf भी शामिल था। ख़बरों के मुताबिक सलमान ने सुशांत और सूरज पंचोली के बीच में हुए विवाद में सूरज पंचोली की साइड लेते हुए सुशांत को बॉयकॉट कर दिया था )


बॉयकॉट के साथ-साथ शुरू हुआ सुशांत के स्टारडम को ख़त्म करने का दौर, सुशांत को रखैल मैग्ज़ीनों द्वारा  स्कर्ट-चेजर, सेक्स के दौरान अपने गानो को सुनने वाला Narcissist  , Arrogant, Bad-tempered, Disturbed-soul कहकर दुष्प्रचारित किया जाने लगा( इसी तरह का कैंपेन कंगना रनौत के साथ भी चलाया गया था जिसमे अध्ययन सुमन के साथ उनके रिश्ते को आधार बनाकर उन्हें साइको कहकर दुष्प्राचीरित किया गया था) करण जोहर के शो पर आलिया भट्ट 5 एक्टर्स की लिस्ट में एक्टिंग वाइज सुशांत को सबसे नीचे रखती है जिसमे सुशांत से ऊपर सिद्धार्थ मल्होत्रा,वरुण धवन, अर्जुन कपूर जैसे एक्टर्स को रखती है कुछ इसी तरह शुद्ध देसी रोमांस में सुशांत की को-एक्ट्रेस रहीं परिनीति चोपड़ा 5 सेलिब्रिटीज में से 4 को हॉट व सुशांत को नॉट कहते हुए अपना मुँह अपने हाथों में छुपाने लगती है जैसे खुद की ही बात से असहमत हो।करण जोहर के सुशांत की मौत पर किये गए ट्वीट से भी एक तरह से इस बात की पुस्टि होती है जिसमे उन्होंने कहा है की वो पिछले एक साल से सुशांत से बात करना चाहता था जो ये बताता है की कही न कही उन्हें सुशांत के साथ चल रही चीजों का एहसास था।  यह साफ दिखाता है की किस तरह सुशांत को केंद्र में रखकर एक हेट-कम्पैन चलाया जा रहा था और यह सब जिन्दा दिल सुशांत के इर्द-गिर्द  मनोविज्ञान के गैस-लाइटिंग इफ़ेक्ट की तरह काम करने लगा था जिसकी वजह से सुशांत खुद को नितांत अकेला महसूस करने लगा था जो खुद सुशांत ने अपने इंटरव्यूज में कहा है की उनसे कोई दोस्ती नहीं रखना चाहता है। सुशांत के डायरेक्टर रहे अभिषेक कपूर ने भी कुछ इसी तरह की बात कही की सुशांत दूसरों से खुद के काम की वेलिडेशन की अपेक्षा रखने लगा था और केदारनाथ की शूटिंग के समय खोया-खोया रहता था।
 

गैस लाइटिंग ने किस तरह सुशांत को प्रभावित किया था, संभवतः हम यह उनकी २ मई को की गयी इंस्टग्राम पोस्ट में देख सकते है।
 I got up today and looked at myself through your eyes,
and then looked back at you with everything I understood I was...
#selfmusing
यह साफ है की सुशांत को एक एजेंडे की तरह ऑउटसीडेर्स की तरह ट्रीट किया जा रहा था और चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखने वाला सुशांत नफरतो के इस माहौल में डिप्रेशन में धंसता चला गया। 

शेखर कपूर लिखते है, सुशांत एक नरम दिल, अपनी क्राफ्ट से प्यार करने वाला और दुसरो के प्रति संवेदना से भरा हुआ था। उसमे एक बच्चे की तरह जिज्ञासा थी और उन्हें जानने की अपार ऊर्जा एवं सामर्थ्य परन्तु साथ ही साथ कहते है दुर्भाग्य से प्रोडूसर्स इन्ही चीजों का फायदा उठाते है। अभिनव सिन्हा ने किसी का नाम न लेते हुए कुछ लोगो को अपने अंदर झाँकने की नसीहत दी।
पर सुशांत अपने हिस्से का सच अपने साथ ले गया लेकिन आत्म-हत्या और डिप्रेशन का लम्बा पीरियड इस बात का गवाह है कुछ तो बहुत गलत हुआ था जो इरफान के रास्ते जाने वाला सुशांत परवीन बाबी के रास्ते चलने पर मजबूर हुआ। अफ़सोस की अपने आखिरी समय में भी वो जो कहना चाहता था नहीं कह पाया-
एहसान तेरा होगा मुझ पर दिल चाहता है वो कहने दो ...


                                                                     










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