शब्द-

शब्द क्या है ?
दिशा,दशा,दृस्टि, भाव, सार।
अर्जुन की तरह आँख पर ध्यान लगाने जैसा है शब्द में उतरना।
उतरकर अनंत की राह भी खोज सकते है।
और फिसलकर संशय के दलदल में भी धंस सकते है।
खुद सोचिये पूरब को उत्तर कहेगे तो कहा जायेगे ?
पर ठंडा मतलब कोको कोला की समझ रखने वाले
शब्द के गूढ़ रहस्य को नहीं समझते।
इनकी यह समझ लस्सी और कोकाकोला में अंतर नहीं कर पाती।
अंतर करना प्रकृति है। प्रकृति विविधताओं से भरी हुयी है।
विविधता हमारा जीवन है और शब्द इसकी इकाई।
बिना उचित शब्दों के चयन के, लोग दावा करते है वे भी वही कहना चाह रहे है
पर सोये हुआ व्यक्ति जैसा सपनो में बड़बड़ाता है , हम समझ पाते है तो सिर्फ बड़बड़ाना।

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